अल्सर पेट की इस जानलेवा बीमारी को कैसे दूर करें 15 Valuable उपाय

अल्सर क्या होता है?

एक प्रकार के घाव होते हैं जो पेट, आहारनाल या आँतों की अंदरूनी सतह पर विकसित होता है।
पेट में अल्सर होना बेहद खतरनाक होता है। अगर वक्त रहते इलाज नहीं कराया गया तो यह कैंसर में तब्दील हो सकता है। अगर आपको पेट की बीमारियां हो रही हैं तो इन्हें बिल्कुल भी हल्के में न लें। दरअसल खानपान की अनियमितता, शराब और सिगरेट के ज्यादा सेवन और गैस्ट्रिक की समस्या की वजह से पेट में छाले व घाव हो जाते हैं। ज्यादा तनाव लेने की वजह से भी पेट में अल्सर हो सकता है। आंतों में जलन और बार-बार डकार आना भी निशानी हो सकती है।

अल्सर
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अल्सर के कारण

चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब का बार-बार सेवन, गर्म, मसालेदार, रूखे, जलन पैदा करने वाले भोजन, मसालेदार और अम्लीय भोजन, चिंता, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि, काम के बोझ का दबाव, जल्दी-जल्दी काम करना। अल्सर तनाव के कारण या मानसिक तनाव, बेचैनी आदि के कारण होता है। पेप्टिक अल्सर में पेट और ग्रहणी की म्यूकोसा में अल्सर हो जाते हैं। धीरे-धीरे क्षय भी होने लगता है और ऊतक भी सड़ने लगते हैं। इसके कारण म्यूकोसा पाचक रसों की क्रिया को सहन नहीं कर पाता और परिणामस्वरूप ऊतक नष्ट होने लगते हैं और अल्सर बन जाते हैं।

अल्सर के लक्षण

लक्षणों में पेट में जलन होना शामिल है। खट्टी डकारें आना, खट्टी उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर आना, भूख न लगना, पित्त का तेजी से बढ़ना, जलन जो खाने के कुछ देर बाद दूर हो जाती है, कब्ज। रोग बढ़ने पर शौच के साथ रक्तस्राव, पेट में जलन और छाती तक फैल जाती है। लक्षणों में कमजोर शरीर, बेहोश दिमाग, चिड़चिड़ापन आदि शामिल हैं।

अल्सर को दूर करने के आयुर्वेदिक उपचार

  • छोटी हरड़ और मुनक्का को पीसकर गोली बनाकर सुबह-शाम भोजन के बाद लेने से लाभ होता है।
  • पेट के दर्द में जीरा, सेंधा नमक और घी में भूनी हुई हींग का प्रयोग करें। आंवले के रस में शहद मिलाकर पीने से भी फायदा होता है।
  • भोजन के बाद पान खाना भी लाभकारी होता है। मरीजों को हर दिन कम से कम एक केला खाना चाहिए। एसिड को कम करके
    सूजन को कम करता है।
  • पिसे हुए सूखे आंवले को रात भर भिगोकर रखें। सुबह आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ, चौथाई भाग मिला दें
    इसमें एक चम्मच जीरा और थोड़ी सी पिसी हुई मिश्री मिलाकर पीने से काफी राहत मिलेगी।
  • दिन में तीन बार एक कप पत्तागोभी का रस पियें। ताजा जूस ही पियें, इसे कम से कम दो सप्ताह तक पियें। लाभ होगा।
  • रोगी को अनार का रस और आंवले का मुरब्बा खिलाएं।
  • कच्चे केले की सब्जी लाभकारी होती है।
  • भोजन के कुछ घंटों बाद और रात में पेट के ऊपरी हिस्से में जलन और दर्द शुरू हो जाता है। इस रोग में खाली दूध नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी बढ़ती है। तम्बाकू, कैफीन आदि के सेवन से अल्सर की समस्या बढ़ जाती है इसलिए इन्हें बंद कर देना चाहिए। दिन में तीन बार की बजाय छह बार छोटे-छोटे हिस्से में खाना खाना चाहिए।
  • पीड़ित रोगी के लिए चाय बहुत हानिकारक होती है, इसलिए रोगी को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • पचास ग्राम कुल्थी की दाल को 250 ग्राम पानी में मिट्टी के बर्तन में रखें। सुबह-शाम दोबारा वही पानी पिएं। एक-दो माह में लाभ होगा।
  • पीड़ित रोगी को चने का सत्तू खिलाना चाहिए।
  • खजूर अल्सर में फायदेमंद होता है।
  • छेना का पानी पीने से रोगी को आशातीत लाभ मिलता है। यह दोपहर बाद में लेना चाहिए।
  • गेहूं के नवजात पौधे का रस कुछ दिनों तक पीने से दोनों प्रकार के अल्सर में लाभ होता है।
  • ऐसे में खरबूजे का जूस पीना फायदेमंद होता है।
  • पके मीठे और रसीले आम का रस छानकर पीने से लाभ होता है।
  • सब्जियों में नमक बिल्कुल खाने से बचें या कम मात्रा में खाएं।

  • FAQ…

    Q.1 अल्सर की पहचान क्या है?
    Ans.खट्टी डकारें आना, खट्टी उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर आना, भूख न लगना, पित्त का तेजी से बढ़ना, जलन जो खाने के कुछ देर बाद दूर हो जाती है, कब्ज।
    Q.2 अल्सर बीमारी क्यों होती है?
    Ans. चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब का बार-बार सेवन, गर्म, मसालेदार, रूखे, जलन पैदा करने वाले भोजन, मसालेदार और अम्लीय भोजन, चिंता, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन, खानपान की गलत आदतें और उसकी वजह से बनने वाला एसिड प्रमुख वजह है।
    Q.3 पेट का अल्सर फटने से क्या होता है?
    Ans.यदि समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह आंतों में कैंसर का कारण भी बन सकता है।

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